अजय अग्रवाल
बालोद। घड़ी ने जैसे ही रात के 12 बजाए, नगर की राजनीतिक कहानी में ऐसा ट्विस्ट आया कि सुबह होते-होते यह चर्चा शहर की गलियों, चौराहों और चाय की दुकानों तक पहुंच गई।
लौह अयस्क नगरी दल्लीराजहरा में इन दिनों मौसम भले ही बदल गया है और वातावरण में ठंडकता आ गई लेकिन भाजपा की स्थानीय राजनीति का तापमान कुछ ज्यादा ही चढ़ा हुआ नजर आ रहा है। अब तक जो खींचतान पार्टी की चारदीवारी और भाजपा के व्हाट्सएप ग्रुपों तक सीमित बताई जा रही थी, वह बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात अचानक नगर की गलियों और पालिका अध्यक्ष के घर तक पहुंच गई।
कहानी भी कुछ ऐसी कि शहर में सुबह होते-होते हर चाय की दुकान पर एक ही सवाल-आधी रात को आखिर ऐसा क्या हुआ कि पालिका उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के घर के दरवाजे पर धरने पर बैठना पड़ा?
बताया जा रहा है कि बुधवार एवं गुरुवार की मध्यरात्रि करीब 12 से 01 बजे के बीच दल्लीराजहरा नगर पालिका के उपाध्यक्ष मनोज दुबे (पिंटू) अपने कुछ समर्थकों के साथ नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू के निवास पहुंचे और उनके घर के बाहर धरने पर बैठ गए।
रात का सन्नाटा था… लोग सो रहे थे…
लेकिन राजनीति जाग चुकी थी! सुबह मामले की जानकारी पुलिस-प्रशासन और पार्टी के लोगों तक पहुंची तो मौके पर पहुंचकर बातचीत के जरिए स्थिति संभालने का प्रयास शुरू हुआ। आसपास के लोगों को जैसे-जैसे खबर मिली, वैसे-वैसे भीड़ भी जुटने लगी। लेकिन मामला इतनी जल्दी शांत होने वाला नहीं था।
उपाध्यक्ष और उनके साथ बैठे समर्थक अपनी मांग पर डटे रहे। संवाद का दौर चलता रहा और रात कब सुबह में बदल गई, इसका पता ही नहीं चला। सुबह करीब 9 बजे तक ये पूरा घटनाक्रम चलता रहा। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप कर दोनों पक्ष को बैठक के लिए बुलाया। तब जाकर मामला कुछ शांत हुआ !
लेकिन असली सवाल तो अब शुरू होता है…
आखिर आधी रात के इस धरने के पीछे की कहानी क्या है?
शहर की सियासी गलियों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे नगर पालिका के भीतर चल रही खींचतान, कमीशनखोरी और चहेतों को काम देने से जोड़कर देख रहा है तो कोई इसे संगठन के भीतर वर्चस्व की लड़ाई बता रहा है। इसी बीच भाजपा जिला महामंत्री सौरभ लूनिया को मिले गनमैन को हटाने को लेकर शिकायत छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया सहित दिल्ली तक की गई शिकायत की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में होने लगी है। हालांकि इन चर्चाओं और घटनाक्रम के बीच वास्तविक संबंध क्या है, यह स्पष्ट होना बाकी है।
शहर पूछ रहा है… आखिर माजरा क्या है जनाब…
क्या गनमैन का मामला इस अंदरूनी खींचतान की एक कड़ी है?
क्या नगर पालिका के कामकाज में एक नेता के कथित हस्तक्षेप को लेकर नाराजगी है?
क्या अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है?
क्या नगर पालिका के किसी काम या कथित आर्थिक बंटवारे को लेकर मतभेद हैं?
या फिर मामला वास्तव में नगर के विकास और कामकाज से जुड़ा हुआ है?
और सबसे बड़ा सवाल!
आधी रात को अध्यक्ष के घर के दरवाजे तक पहुंचा विवाद आखिर शुरू कहां से हुआ?
राजनीति में कहा जाता है कि जहां धुआं दिखाई देता है, वहां आग जरूर जल रही हो-यह जरूरी नहीं, लेकिन ये धुआं आया कहां से, यह जानने की उत्सुकता सभी के मन में जरूर है।
दल्लीराजहरा में भी अब लोग इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच हुई बैठक के बाद मामला शांत जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन क्या अंदर की खींचतान सच में खत्म हो गई है या फिलहाल सिर्फ पर्दा गिरा है?
जिला अध्यक्ष की चुप्पी और मीडिया के सवालों से बचना, जिला संगठन पर खड़े कर रहा है सवाल….
वहीं इस पूरे मामले को लेकर जब जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख को फोन लगाया गया तो उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा, इससे ऐसा प्रतीत होता है कि उक्त मामले को लेकर जिला अध्यक्ष बचने का प्रयास कर रहे है।
अब इस पूरे मामले पर आप पाठकगणों का क्या कहना है?
क्या यह सिर्फ संगठन के भीतर का मतभेद है या इसके पीछे कोई बड़ी खिचड़ी पक रही है?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।अगले अंक में इन तमाम सवाल का जवाब जल्द…
तो इंतजार कीजिए अगले अंक का…बने रहिए- छत्तीसगढ़ 2Day के साथ।
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