बालोद/डौंडी। ग्राम मरदेल एवं आसपास के ग्रामीण इलाकों में बस्ती के पास भालू छोड़े जाने और डौंडी वन परिक्षेत्र में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पूर्व में दी गई शिकायतों पर कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गुरुवार को तहसील कार्यालय डौंडी के समक्ष जोरदार धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने डौंडी रेंजर जीवन भोंडेकर को तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई।
भालू छोड़ने और कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने 22 सितंबर को प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मरदेल क्षेत्र के पास भालू छोड़े जाने, वन विभाग की संदिग्ध कार्यप्रणाली और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। तय समयसीमा में कार्रवाई न होने पर पूर्व घोषित चेतावनी के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि तहसील कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की।
5 साल से अटका किसान का किराया का मामला भी सुलझा
आंदोलन के दौरान वन विभाग से जुड़े एक अन्य संवेदनशील मामले को भी प्रमुखता से रखा गया। ग्राम नर्रालगुड़ा निवासी डोमन रावटे के घर पर वन विभाग द्वारा पिछले 5 वर्षों से सीमेंट रखा गया था, जो पूरी तरह खराब हो चुका था। विभाग न तो सीमेंट हटा रहा था और न ही मकान का किराया दे रहा था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक बातचीत के बाद किसान को 30,000 रुपये के कुल बकाया में से 20,000 रुपये का तत्काल भुगतान किया गया तथा शेष 10,000 रुपये एक महीने में देने का लिखित आश्वासन दिया गया, जिसके बाद पीड़ित किसान ने ग्रामीणों का आभार जताया।
DFO बालोद ने फोन पर दिया जांच का भरोसा
प्रदर्शन में जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने ग्रामीणों का नेतृत्व करते हुए अधिकारियों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने धरना स्थल से ही बालोद DFO से दूरभाष पर चर्चा की। बातचीत के दौरान DFO ने ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों/कर्मियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया है, हालांकि उनकी नजरें अब विभागीय जांच और रेंजर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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