अजय अग्रवाल
बालोद (छत्तीसगढ़): बालोद जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा 10वीं के छात्र विनय कुमार रावटे की आत्महत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। न्याय की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और कलेक्ट्रेट के सामने ही धरने पर बैठ गए। पीड़ितों की इस लड़ाई में उन्हें जनप्रतिनिधियों का भी सीधा समर्थन मिला, पूर्व मंत्री व डौंडीलोहारा विधायक अनिला भेंड़िया और गुंडरदेही विधायक कुंवरसिंह निषाद भी परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।
रैगिंग और प्रताड़ना का आरोप, वार्डन व प्रिंसिपल पर कार्रवाई की मांग
परिजन और ग्रामीणों का आरोप है कि सीनियर छात्रों द्वारा की जा रही रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ही विनय ने यह खौफनाक कदम उठाया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और हॉस्टल वार्डन, प्रिंसिपल, पीटीआई टीचर तथा घटना के जिम्मेदार अन्य लोगों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

परिजनों से चर्चा करने खुद पहुंचे कलेक्टर-एसपी
माहौल को देखते हुए बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक (SP) किरण गंगाराम चव्हाण धरने पर बैठे ग्रामीणों तथा दोनों विधायकों से सीधी बातचीत की।
कलेक्टर ने परिजनों को आश्वस्त किया कि हॉस्टल वार्डन को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाकर अटैच किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोर कार्रवाई होगी। आश्वासन मिलने के बाद ही परिजन और विधायक धरने से उठे।
क्या था पूरा मामला?
बीते 14 सितंबर को डौंडी के एकलव्य आवासीय परिसर में सुबह जब अन्य छात्र पीटी (PT) के लिए मैदान में गए थे, तब विनय अपने कमरे में ही रुक गया था। पीटी से लौटने के बाद जब साथियों ने कमरे का दरवाजा धक्का देकर खोला, तो विनय का शव फांसी के फंदे पर झूलता मिला। घटना से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस और परिजन मौके पर पहुँचे और शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम व जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

मोबाइल और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े कई गंभीर सवाल
जांच के दौरान मामले में कुछ अन्य पहलू भी सामने आ रहे हैं:
- परिसर में मोबाइल की मौजूदगी: जांच में सामने आया है कि मृतक छात्र फोन के जरिए किसी महिला मित्र से बातचीत करता था, जिसकी पुष्टि परिजनों ने भी की है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सख्त नियमों वाले आवासीय परिसर के भीतर छात्र को मोबाइल ले जाने की अनुमति किसने दी और प्रबंधन की इस पर नजर क्यों नहीं पड़ी?
- नशीले पदार्थों के इस्तेमाल का आरोप: परिजनों और ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि परिसर के अंदर नशीले पदार्थों का सेवन किया जा रहा है, जिससे अन्य बच्चे डरे हुए हैं और कई बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा: परिजनों की मांग को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल वार्डन को तत्काल प्रभाव से हटाकर अटैच कर दिया गया है। मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चौहाण: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी है। रैगिंग के आरोपों, परिसर में नशीले पदार्थों के सेवन और मोबाइल से जुड़े तमाम पहलुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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