खोमेश्वर गुरुपंच
CHHATTISGARH/ उस शाम सूरज ढल चुका था, पर कजराबांधा गाँव के 34 वर्षीय डागेश्वर साहू के चेहरे पर एक अजीब सी आत्मीय तृप्ति थी। अपने मामा के घर ग्राम मोहारा में आयोजित सामाजिक पितृ श्राद्ध मिलन का कार्यक्रम समाप्त कर वे बेहद खुश थे। उनके दोनों जिगर के टुकड़े-12 साल का मासूम ओशांत साहू और 8 साल का नटखट अनुराग-साथ में थे।
त्योहार और पारिवारिक मिलन का माहौल था। बाइक पर बैठते वक्त पिता ने छोटे अनुराग को संभाला और बड़े ओशांत साहू को अपनी पीठ से सटाकर बिठाया। ठंडी हवा में तीनों बाप-बेटे बातें करते, हँसते-खिलखिलाते अपने घर कजराबांधा की ओर लौट रहे थे। उन्हें क्या मालूम था कि मौत रास्ते में उनका इंतज़ार कर रही है।
बालोद जिले के सनौद थाना क्षेत्र में गुंडरदेही-धमतरी मुख्य मार्ग पर, अरमरीकला स्थित पेट्रोल पंप के सामने शाम के करीब 7 बज रहे थे। सड़क पर सन्नाटा था और चारों तरफ गहराता अँधेरा। मार्ग किनारे एक भारी-भरकम ट्रक बिना किसी इंडिकेटर या पार्किंग लाइट के खड़ा था-मानो अँधेरे में अपनी पहचान छुपाए बैठा हो।
डागेश्वर बाइक चला रहे थे। अँधेरा इतना घना था कि रास्ते पर खड़ा वह लोहे का ढाँचा उन्हें आखिरी समय तक दिखाई ही नहीं दिया।
और फिर… एक ज़ोरदार चीख और सब कुछ ठहर गया।
बाइक सीधे खड़े ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। उस भयानक टक्कर की गूँज सन्नाटे को चीरती हुई दूर तक गई। डागेश्वर साहू का शरीर वहीं बेजान हो गया। उनके जीवन का दीया वहीं बुझ गया।
पीछे गिरे दोनों बच्चे लहूलुहान होकर तड़प रहे थे। राहगीर और पुलिस भागकर मौके पर पहुँचे। डागेश्वर की मौके पर ही साँसें थम चुकी थीं, लेकिन 12 साल के ओशांत साहू और 8 साल के अनुराग की साँसें अब भी चल रही थीं। उन्हें तुरंत धमतरी के अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल के सफ़ेद कमरों में जहाँ डॉक्टरों की टीम दोनों बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए जूझ रही थी, वहीं नियति ने एक और ज़ख्म दे दिया। इलाज के दौरान दर्द से छटपटाते हुए 12 वर्षीय ओशांत साहू ने भी दम तोड़ दिया। वह बच्चा, जो कुछ घंटे पहले खिलखिला रहा था, अब सदा के लिए सो चुका था।
अब अस्पताल के उस बिस्तर पर सिर्फ़ 8 साल का मासूम अनुराग ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उसे अभी यह भी नहीं पता कि जिस पिता के कंधों पर बैठकर वह घर लौट रहा था और जिस बड़े भाई के साथ वह खेलता था, वे अब कभी वापस नहीं आएँगे।
आज सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव उनके गाँव कजराबांधा लाये जायेंगे, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा।
सड़क पर बिखरा खून और उजड़ती खुशियाँ… इस तरह की घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि यातायात के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी का दर्दनाक सच है!
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