राहुल ठाकुर
त्रिवेणी संगम के बीच पंचमुखी महादेव का मंदिर पानी में डूबा, जलधारा के बीच भी हुई पूजा-अर्चना; बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट
राजिम। छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी राजिम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने ऐसा मंजर दिखाया, जिसे स्थानीय लोग करीब 35 साल बाद दोबारा देखने की बात कह रहे हैं। त्रिवेणी संगम के मध्य स्थित प्राचीन बाबा कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिर गया और मंदिर परिसर में पानी भर गया।
पंचमुखी महादेव हुए जलमग्न
मान्यता के अनुसार राजिम के बाबा कुलेश्वरनाथ मंदिर का भगवान श्रीराम और माता सीता से जुड़ा धार्मिक महत्व है। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में यहां पंचमुखी शिवलिंग की विशेष आस्था मानी जाती है। कुलेश्वरनाथ महादेव को पंचमुखी स्वरूप और माता सीता द्वारा रेत से शिवलिंग निर्माण की मान्यता से जोड़ती है।
बाढ़ के पानी ने मंदिर के गर्भगृह और आसपास के हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। स्थिति ऐसी बनी कि नंदी बाबा और माता की सवारी माने जाने वाले सिंह के ऊपर से भी पानी बहता नजर आया।
इसके बावजूद मंदिर के पुजारी ने जोखिम के बीच मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। शाम करीब 5 बजे भी पूजा की गई, उस दौरान पंचमुखी शिवलिंग चारों ओर से पानी से घिरा दिखाई दिया।
35 साल बाद फिर आया ऐसा सैलाब?
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब 35 साल बाद राजिम में बाढ़ का ऐसा दृश्य देखने को मिला है, जब कुलेश्वरनाथ मंदिर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया।
राजिम के कई इलाकों में भी भरा पानी
बाढ़ का असर केवल संगम क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। राजिम के प्रमुख इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी रही। सुंदरलाल शर्मा चौक यानी बस स्टैंड क्षेत्र में करीब 3 से 4 फीट तक पानी भरने की जानकारी सामने आई। वहीं गायत्री मंदिर चौक और सुभाष चौक में भी पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ।
प्रशासन अलर्ट, जनप्रतिनिधियों ने लिया जायजा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते रहे। राजिम विधायक रोहित साहू, एसडीएम विशाल महाराणा और नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव सहित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
पानी उतरने लगा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
फिलहाल राजिम में जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगी है, लेकिन ऊपरी और वनांचल क्षेत्रों में यदि बारिश का दौर दोबारा तेज होता है तो उसका असर राजिम के संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में पड़ सकता है।
एक ओर बाढ़ से जूझता राजिम शहर और दूसरी ओर जलधारा के बीच जलमग्न बाबा कुलेश्वरनाथ का पंचमुखी स्वरूप-इस बार की बाढ़ ने राजिम में आस्था और प्रकृति का ऐसा अद्भुत दृश्य सामने ला दिया, जिसकी तस्वीरें लंबे समय तक याद की जाएंगी।
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