किशोर साहू
“इश्क का रिचार्ज मैंने कराया था… बातें किसी और से क्यों की?”
CHHATTISGARH/धमतरी के कुरूद इलाके में प्यार का एक ऐसा खूनी पन्ना लिखा गया, जिसने वफा और प्यार के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। जहां महबूबा के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए दिल से ज्यादा मोबाइल का रिचार्ज कराया जाता था, वहीं उसी रिचार्ज और शक की आग ने एक आशिक को खूनी दरिंदा बना दिया।
जब ‘अनलिमिटेड टॉकटाइम’ बना जानलेवा दुश्मनी की वजह
कहानी शुरू होती है कुरूद की बालाजी राइस मिल से, जहां काम करते-करते कोंडागांव की युवती और भाटागांव के दिलेश्वर के बीच इश्क की घंटी बजी। प्यार परवान चढ़ा, तो आशिक दिलेश्वर ने वफादारी साबित करने के लिए अपनी जेब खाली करना शुरू कर दिया। महबूबा का मोबाइल खाली न रहे, इसलिए उन्होंने खुद के पैसों से ‘अनलिमिटेड बैलेंस’ डलवाने लगा।
लेकिन आशिक को क्या पता था कि जिस रिचार्ज से वो अपनी मोहब्बत की बातें सुनने का ख्वाब देख रहा था, वही फोन किसी और के लिए ‘बिजी’ जाने लगेगा!
शक की घंटी और सिरफिरे आशिक की जलन
धीरे-धीरे दिलेश्वर के दिल में शक का कीड़ा रेंगने लगा। उसे लगने लगा कि जिस डेटा और टॉकटाइम का बिल वो भर रहा है, उसकी महबूबा उसी के बलबूते पर घंटों किसी ‘तीसरे’ से बातें करती है। “रिचार्ज मेरा, आवाज किसी और की!”– बस यही ख्याल दिलेश्वर के दिमाग में जहर बनकर घुल गया। प्यार की जगह जलन ने ले ली और सनक इस कदर हावी हुई कि वफादार आशिक जल्लाद बन बैठा।
घर में घुसकर ताबड़तोड़ वार
गुस्से में अंधा हुआ दिलेश्वर चाकू लेकर सीधे युवती के घर में जा घुसा। बातचीत या सफाई का कोई मौका दिए बिना, उसने अपनी ही प्रेमिका पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। कमर, जांघ और शरीर के कई हिस्सों पर चाकू के गहरे जख्म दे दिए। प्यार का जो रिश्ता रिचार्ज से चलता था, वो पल भर में खून की नदियों में बदल गया। युवती खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग, आरोपी सलाखों के पीछे
घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल युवती को पहले कुरूद अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत नाजुक देखते हुए उसे धमतरी के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां वो जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
डी.सी पटेल, ASP धमतरी ने बताया की यवती अस्पताल में भर्ती है वही आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज पूरी घटना की विवेचना की जा रही है ।
बड़ा सवाल: क्या चंद रुपयों के रिचार्ज और बेवजह के शक की कीमत इतनी बड़ी हो सकती है कि किसी की जिंदगी ही दांव पर लग जाए? इश्क में जब शक का कीड़ा लगता है, तो अंजाम सिर्फ और सिर्फ तबाही होता है।
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