राहुल ठाकुर
गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मदनपुर में संचालित आदिवासी छात्रावास में प्रबंधन की लापरवाही से दो छात्रों के गंभीर रूप से झुलसने की घटना सामने आई है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की, बल्कि मामले को दबाने का प्रयास किया जाता रहा।
भूख लगने पर रसोई पहुंचे थे छात्र
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 19 सितंबर की है। छात्रावास में 9वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्र ओंकार ध्रुव और मुरली को भूख लगी थी। इस दौरान रसोई कक्ष में रखे प्रेशर कुकर को खोलते समय अचानक हादसा हो गया और गर्म दाल उनके ऊपर गिर गई। गर्म दाल की चपेट में आने से दोनों छात्रों का चेहरा, हाथ और पैर झुलस गए।
परिजनों से छिपाई गई घटना, परीक्षा से वंचित हुए छात्र
हादसे के बाद छात्रावास प्रबंधन ने घायल छात्रों को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इस बेहद गंभीर घटना की सूचना उनके परिजनों को नहीं दी गई। अस्पताल से डिस्चार्ज करने के बाद दोनों छात्रों को गुपचुप तरीके से छात्रावास में ही बेड रेस्ट पर रखा गया। इस अव्यवस्था और लापरवाही के चलते छात्र अपनी त्रैमासिक परीक्षा देने से भी वंचित रह गए।
जब घायल छात्रों ने खुद फोन कर अपने परिजनों को आपबीती सुनाई, तब जाकर इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। वर्तमान में परिजन दोनों बच्चों को घर ले जाकर उनका इलाज करा रहे हैं।
कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से क्षेत्र के आदिवासियों और परिजनों में भारी आक्रोश है। पीड़ित छात्र के पिता दिनेश ध्रुव ने छात्रावास अधीक्षक और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

दिनेश ध्रुव (पीड़ित छात्र के पिता) “अधीक्षक और कर्मचारियों ने बच्चों के जलने की जानकारी हमसे छिपाई। बच्चों को सही समय पर घर नहीं भेजा और न ही परीक्षा देने दिया। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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